निवेशकों-रियल एस्टेट सेक्टर को SEBI का ये नया नियम दिलाएगा फायदा, एक्सपर्ट ने सही ठहराया

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मौजूदा रीट के लिए न्यूनतम संपत्ति मूल्य 500 करोड़ रुपये है।- India TV Paisa
Photo:PIXABAY मौजूदा रीट के लिए न्यूनतम संपत्ति मूल्य 500 करोड़ रुपये है।

मार्केट रेगुलेटर सेबी की तरफ से छोटे और मध्यम रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) सेट अप करने के फैसले को एक्सपर्ट्स ने सही ठहराया है और कहा है कि यह निवेशकों और रियल एस्टेट दोनों के लिए फायदेमंद रहेगा। यह नया नियम जमीन-जायदाद के क्षेत्र के विकास को गति देने में सक्षम होगा। रियल एस्टेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स ने बीते सोमवार को कहा कि रीट के जरिये आंशिक मालिकाना हक को नियमों के दायरे में लाने से न सिर्फ निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि यह वाणिज्यिक के साथ ही किफायती आवासीय रियल एस्टेट के लिए भी फादेमंद होगा।  

आंशिक स्वामित्व की ग्रोथ को भी गति मिलेगी

खबर के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे निवेश के नए माध्यम यानी किराया अर्जित करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों में आंशिक स्वामित्व की ग्रोथ को भी गति मिलेगी। भाषा की खबर के मुताबिक, रियल एस्टेट क्षेत्र का शीर्ष निकाय नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष जी हरि बाबू ने एक बयान में कहा कि लघु और मध्यम रीट को सेबी से मिली मंजूरी और आंशिक स्वामित्व मंचों को नियमों के तहत लाना रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास को गति देने लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें न्यूनतम परिसंपत्ति मूल्य को घटाकर 50 करोड़ रुपये करने का फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास के मुताबिक निवेशकों को आकर्षक अवसर प्रदान करता है।

सेबी बोर्ड ने दी थी संशोधन को मंजूरी

बता दें कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल ने पिछले सप्ताह शनिवार को कम से कम 50 करोड़ रुपये की संपत्ति मूल्य वाले छोटे और मध्यम रीट के गठन को सुगम बनाने के लिए नियामकीय ढांचा बनाने को लेकर रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट विनियमन, 2014 में संशोधन को मंजूरी दे दी। मौजूदा रीट के लिए न्यूनतम संपत्ति मूल्य 500 करोड़ रुपये है।

अपरिचित खुदरा निवेशकों को मिलेगी मदद

किराया अर्जित करने वाली संपत्तियों के आंशिक स्वामित्व की सुविधा प्रदान करने वाले रियल एस्टेट टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म योर्स के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) श्रवण गुप्ता ने कहा कि छोटे और मध्यम रीट और रियल एस्टेट आंशिक स्वामित्व खंड को विनियमित करने की सेबी की पहल एक सकारात्मक और जरूरी कदम है। उन्होंने कहा कि सेबी द्वारा प्रस्तावित दिशानिर्देश क्षेत्र को संगठित बनाने, निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और विशेष प्रयोजन इकाई (एसपीवी) प्रतिभूतियों को जारी करने की जटिलता के मुद्दों का निपटान करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह पहल खासकर इससे अपरिचित खुदरा निवेशकों के लिए फायदेमंद है।

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