मोदी सरकार ने बेरोजगारी दर पर लगाई ब्रेक, छह साल के निचले लेवल पर पहुंची, जानें लेटेस्ट रेट

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Unemployment rate - India TV Paisa
Photo:FILE बेरोजगारी दर

मोदी सरकार की ओर से​ पिछले नौ सालों में उठाए गए कदमों और फैसलों का असर अब दिखाई देने लगा है। देश में रोजगार के मौके बढ़ने से बेरोजगारी दर में तेजी से गिरावट आई है। इसके चलते बेरोजगारी दर छह साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की ओर से जारी श्रम बल सर्वेक्षण वार्षिक रिपोर्ट 2022-2023 से यह जानकारी मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2022 से जून 2023 के बीच राष्ट्रीय स्तर पर 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए बेरोजगारी दर (यूआर) 2021-22 में 4.1 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 3.2 प्रतिशत हो गई। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी दुनिया मंदी की चपेट में है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। इसका फायदा कंपनियों को मिल रहा है। कंपनियां बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए नियुक्तियां कर रही हैं। इससे रोजगार के मौके पैदा हो रहे हैं, जिससे बेरोजगारी घट रही है। 

बेरोजगारी दर घटकर 3.2 प्रतिशत पर आई 

आपको बता दें कि देश में जुलाई 2022 से जून 2023 के बीच 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की बेरोजगारी दर छह साल के निचले स्तर 3.2 प्रतिशत पर रही। बेरोजगारी दर को काम करने वाले लोगों में जिनको रोजगार नहीं मिला उनके आधार पर निकाला जाता है। सामान्य स्थिति का मतलब है कि रोजगार, सर्वेक्षण की तारीख से पहले के 365 दिन के आधार पर निर्धारित किया गया है। आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर 2020-21 में 4.2 प्रतिशत, 2019-20 में 4.8 प्रतिशत, 2018-19 में 5.8 प्रतिशत और 2017-18 में छह प्रतिशत थी। भारत में पुरुषों में बेरोजगारी दर 2017-18 में 6.1 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 3.3 प्रतिशत हो गई। महिलाओं में बेरोजगारी दर 5.6 प्रतिशत से घटकर 2.9 प्रतिशत रही।

शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटकर 6.6 प्रतिशत पर 

देश में अप्रैल-जून, 2023 की तिमाही के दौरान शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत से घटकर 6.6 प्रतिशत रह गई है। अप्रैल-जून, 2022 में बेरोजगारी दर अधिक थी, जिसका मुख्य कारण देश में कोविड-19 वैश्विक महामारी से संबंधित अंकुश के प्रभाव थे। काम करने वाली जनसंख्या के उस हिस्से को संदर्भित करता है जो वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन के लिए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए श्रम की आपूर्ति करता है या आपूर्ति करने की पेशकश करता है। इसलिए इसमें कामकाजी तथा बेरोजगार दोनों लोग शामिल हैं। 

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