ऑप्शन से कमाई करने की सोच रहे निवेशकों के लिए खुशखबरी, सेबी करने जा रहा ये बड़ा काम

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SEBI - India TV Paisa
Photo:FILE SEBI

Options SEBI: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शनिवार को कहा कि वह जोखिम आधारित दृष्टिकोण अपनाकर वायदा एवं ऑप्शन खंड में ग्राहकों को जोड़ने की प्रक्रिया के सरलीकरण पर विचार कर रहा है। इस संबंध में प्रक्रिया शुरू हो गई है, हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में हैं। सेबी ने कहा कि इसके अलावा, वायदा एवं ऑप्शन बाजार में खुदरा सहभागिता पर रोक लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सेबी का यह बयान उन खबरों के बाद आया है, जिनके अनुसार सेबी वायदा एवं ऑप्शन बाजार में खुदरा सहभागिता को रोकने पर विचार कर रहा है। 

क्या है नियम?

सेबी की ओर से दिसंबर 2009 में जारी अधिसूचना के अनुसार, फिलहाल वायदा एवं विकल्प खंड में कारोबार के लिए शेयर ब्रोकर को अपने सभी ग्राहकों की वित्तीय क्षमता के दस्तावेजी सबूत रखना जरूरी हैं। बाजार नियामक ने बयान में कहा कि कारोबारी सुगमता के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सेबी इसका मूल्यांकन करने के शुरुआती चरण में है कि क्या उपरोक्त परिपत्र को ग्राहकों के जोखिम मूल्यांकन के आधार पर लागू किया जा सकता है। बयान के अनुसार, इससे ब्रोकरों और निवेशकों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा।

नई व्यवस्था में कारोबारी सदस्य को रकम अंतरित करने के बजाय निवेशकों का पैसा उनके अपने ही बैंक खातों में ‘ब्लॉक’ रखने का प्रावधान होगा। यह व्यवस्था प्राथमिक बाजार (आईपीओ खरीद-बिक्री बाजार) में मौजूदा ‘आवेदन आधारित राशि ब्लॉक’(असबा) की सुविधा जैसी होगी। इसमें निवेशकों का पैसा खाते से तभी निकलता है, जब शेयर का आवंटन हो जाता है। 

1 जनवरी, 2024 से प्रभाव में आएगी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि नई व्यवस्था 1 जनवरी, 2024 से प्रभाव में आएगी। इस व्यवस्था के तहत कोष ग्राहक के खाते में ही रहेगा लेकिन समाशोधन निगम के पक्ष में ‘ब्लॉक’ होगा। राशि तय समय या समाशोधन निगम की तरफ से जारी किए जाने तक ‘ब्लॉक’ रहेगी। सेबी के अनुसार कोष और प्रतिभूतियों का निपटान समाशोधन निगम करेगा। इसके लिये सदस्य द्वारा ग्राहकों के कोष और प्रतिभूतियों के रखरखाव की जरूरत नहीं होगी। इस प्रक्रिया से ग्राहकों की राशि का दुरूपयोग नहीं हो पाएगा। साथ ही ब्रोकर ग्राहकों का पैसा लौटाने में चूक नहीं कर पाएंगे। कुल मिलाकर पूंजी को लेकर जोखिम नहीं रहेगा। जो ग्राहक एकमुश्त राशि को ब्लॉक करते हैं, उनके लिये विभिन्न निपटान दायित्वों के लिये कई बार डेबिट किया जा सकता है।

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